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Cleaner Fossil Energy Task Force Reference Materials

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स्वच्छतर जीवाश्म ऊर्जा कार्य बल

अध्यक्ष: ऑस्ट्रेलिया
सह अध्यक्ष: चीन

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कार्य योजना (अंग्रेजी में) - एडोब पीडीएफ फॉर्मैट

प्रोजेक्ट रोस्टर

कोयला और गैस छहों साझीदार देशों के लिए न सिर्फ अत्यंत महत्वपूर्ण ईंधन हैं, बल्कि रहेंगे भी। कोयले और गैस की कुछ प्रमुख उन्नत प्रौद्योगिकियां हैं, जिनमें ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन, वायु जनित प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय प्रभावों के स्तर को कम करने की क्षमता है। ये उन प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित हैं, जो कार्बनडाई ऑक्साइड के ग्रहण और भंडारण और वैकल्पिक उन्नत विद्युत उत्पादन प्रणाली से जुड़ी हैं। इनमें एकीकृत गैसीफिकेशन कंबाइंड साइकिल (आईजीसीसी), ऑक्सी ईंधन और पोस्ट कंबशन कैप्चर शामिल हैं। इनके अलावा अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पल्वराइज्ड फ्यूल, कोयले की सफाई और प्रसंस्करण, पॉली जेनरेशन, हाइड्रोजन उत्पादन, बढ़ी हुई कोयला पट्टी और वेसट कोल माइन मीथेन और कोयला गैसीकरण एवं लिक्विफैक्शन जैसी कुछ प्रौद्योगिकियां हैं जो जीवाश्म ऊर्जा के भविष्य को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

यह स्वत:स्पष्ट है कि नई प्रौद्योगिकियों की लागत समय के साथ-साथ घटती रहती है। साझीदारी का एक बड़ा मकसद यह है कि सहयोग आधारित अनुसंधान और उनके सतत प्रदर्शनों के जरिये इन प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रयोग को गति दी जाए, ताकि इनकी लागत कम हो और कम उत्सर्जन की विविध प्रौद्योगिकियों की एक फेहरिस्त हमारे पास हो। कम या शून्य उत्सर्जन वाली बिजली उत्पादन सुविधाओं के लिए प्रमुख प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के अवसर हमारे पास उपलब्ध हैं।

इसके अलावा लिक्विफाइड नेचुरल गैस के वितरण में आने वाली बाधाओं की पहचान और उन पर विचार किए जाने की जरूरत है। साथ ही एशिया प्रशांत साझीदारी देशों में उच्च स्तरीय, पहुंच के भीतर और कम उत्सर्जन वाले ईंधन की बढ़ती जरूरत को पूरा करने की भी उतनी ही जरूरत है।

उद्देश्य

  • एशिया-प्रशांत साझीदारी स्वच्छतर जीवाश्म ऊर्जा प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम को विकसित करने के लिए मौजूदा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय उपायों और पहलों की दिशा में काम करना।
  • साझीदार देशों में कार्बनडाई ऑक्साइड के भू-पृथक्करण अवसरों के लिए संभावनाओं की पहचान और प्रोत्साहन।
  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कोयला पट्टी, वेस्ट कोल माइन मीथेन गैस और एलएनजी या नेचुरल गैस के अवसरों और बाजारों को और विकसित करना।
  • शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल की अदला-बदली जैसी टेक्नोलॉजी समर्थित पहलों के जरिये साझीदारों के यहां अनुसंधान एवं विकास का आधार मजबूत करना। साथ ही बाजार और सांस्थानिक आधार मजबूत करना।