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प्रोजेक्ट रोस्टर - नवीकरणीय ऊर्जा एवं वितरित उत्पादन कार्य बल

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नवीकरण योग्य ऊर्जा एवं वितरित उत्पादन कार्य बल कार्ययोजना (अंग्रेजी में) - पीडीएफ फॉर्मैट

RDG-06-01 अत्यंत उच्च क्षमता वाले सौर ऊर्जा केंद्रों के लिए जटिल पुंज का निर्माण*
RDG-06-02 विद्युत केंद्रों के लिए पीईएम ईंधन सेल का व्यावसायिक प्रदर्शन - (रद्द)
RDG-06-03 पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा व जल सेवाओं के लिए जैव ईंधन को प्रोत्साहन - (रद्द)
RDG-06-04 एपीपी वृहद सौर योजना
RDG-06-05 चीन में सीएचपी प्रणाली का इस्तेमाल, जो ईंधन केभंडारण केलिए कोक ओवन गैस का उपयोग करती है
RDG-06-06 चीन और भारत में नवीकरणीय ऊर्जा एवं ग्रामीण व्यवसाय केंद्र - (रद्द)
RDG-06-07 अतिकुशल सीएचपी प्रयोगें के प्रसार को सुसाध्य बनाना। इसमें साझीदार देशों में जीवाश्म एवं जैव ईंधन संचालित औद्योगिक, सांस्थानिक और जिला उर्जा सीएचपी योजना शामिल हैं।
RDG-06-08 चीन में अति संभावनाशील भूतापीय उर्जा परियोजनाओं की पहचान
RDG-06-09 विकासशील साझीदार देशों में नवीकरणीय उर्जा समझ् की नियामक बाधाओं का विश्लेषण
RDG-06-10 ऑस्टे्रलिया और भारत के बीच स्वज्छ प्रौद्योगिकी निवेश के विकास और प्रसार की बाधाए - ं (पूर्ण)
RDG-06-11 एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा और वितरित उत्पादन के लिए आर्थिक सूचकों का विकास - (रद्द)
RDG-06-12 साझीदारी में पुनर्विस्तार के लिए एक सक्षम ढांचे का सृजन
RDG-06-13 चीन और भारत में स्तरीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रशिक्षण
RDG-06-14 न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय में फोटो-वोल्टीय और सौर उर्जा इंजीनियरिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्कॉलरशिप
RDG-06-15 नवीकरणीय ऊर्जा प्रोत्साहन नीति व उपायों के लिए क्षमता निर्माण
RDG-06-16 विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल से ऊर्जा समाधान की संभावनाओं का अध्ययन व विकास*
RDG-06-17 एशिया-प्रशांत क्षेत्र में परिवहन केलिए जैव-डीजल की विस्तार योजना का अध्ययन - (रद्द)
RDG-06-18 पुनर्नवीकृत ऊर्जा के लिए बाजार विकास।
RDG-06-19 साझेदार देशों में जलविद्युत पर सरकारी-निजी साझीदारी।
RDG-06-20 भारत में हाइड्रोजन दहन इंजन जेनरेटर का इस्तेमाल करते हुए विद्युत उत्पादन का वितरण। स्वज्छ हवा, ऊर्जा सुरक्षा और जारी रहने योग्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देना। - (रद्द)
RDG-06-21 बिजली और यातायात उपकरणों के लिए सौर ईंधनों का प्रदर्शन।
RDG-06-22 विद्युत उत्पादन के वितरण के लिए लचीली बायोमास गैसीकरण तकनीक।
RDG-06-23 सौर फोटोवोल्टिक लिनिअर कन्सेंट्रेटर सिस्टम्स।
RDG-06-24 रंग संवेदनशील सौर कोशिकाओं के लिए पदार्थों और इंजीनियरिंग तकनीकों का विकास। - (रद्द)
RDG-07-25 एक सोलर बायोमास हाइब्रिड कूलिंग और विद्युत उत्पादन प्रणाली के लिए डिजाइन विकसित करना।
RDG-07-26 खरे पानी में सूक्ष्म शैवाल से बायोडीजल उत्पादन के लिए एक पूरी तरह समेकित प्रक्रिया।
RDG-07-27 दूरस्थ क्षेत्रों में विद्युत प्रणाली और ग्रिड कनेक्शन के लिए नई पीढ़ी के स्मॉल विंड टरबाइन।
RDG-08-28 पुनर्नवीकृत ऊर्जा आधारित सशक्तिकरण के जरिये आर्थिक दरार को पाटना।
RDG-08-29 एपीपी देशों में 'स्मार्ट मिनी ग्रिड्स’ के विकास को गति देना।
RDG-08-30 भारत में डीजी के लिए पुनर्नवीकृत ऊर्जा के व्यावसायीकरण को गति देना।
RDG-08-31 सुदूर गंवों में पुनर्नवीकृत ऊर्जा के इस्तेमाल से विद्युतीकरण के मॉडल का सामूहिक रूप से विकास और प्रदर्शन।
RDG-08-32 ग्रिड से जुड़े पुनर्नवीकृत ऊर्जा उत्पादन और वितरण साझीदारी।
RDG-08-33 10 किलोवाट प्रोटोन एक्सचेंज मेम्ब्रेंस फ्यूल सेल (पीईएमएफसी) विद्युत प्रणाली का विकास और इस्तेमाल।
RDG-08-34 चीन की स्मॉल गैस टरबाइन पैकेजिंग और मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता हासिल करने के लिए जीई 10 तकनीक की शुरुआत करना।
RDG-08-35 वर्ष 2010 की प्रदर्शनी के लिए फ्यूल सेल कार की डिजाइनिंग और इसके उत्पादन के लिए एसएआईसी-जीएम सहयोग।
RDG-08-36 कोकिंग ओवन गैस (सीओजी) से संबद्ध ताप और ऊर्जा इकाई।
RDG-08-37 पीवी मॉड्यूल विश्ववसनीयता के बारे में चीन के साथ तकनीकी आदान प्रदान
RDG-09-38 वितरित उत्पादन गतिमयता- चीन में संयुक्त ताप और विद्युत उपयोग
RDG-09-39 भारत और जपान में पीवी मौड्यूल की दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए सहकारी अनुसंधान
  • कृपया ध्यान दें कि सभी दस्तावेज एडोब पीडीएफ फॉर्मैट में हैं

परियोजना 1. अति उच्च क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र हेतु क्रिटिकल मास का निर्माण*

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इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य नव ईजाद अल्ट्रा एफीशिएंट फोटोवोल्टेइक कन्संट्रेटर्स के जरिये ऑस्ट्रेलिया, चीन और अमेरिका में एक गीगा वाट की क्षमता वाली पावर-स्टेशन तकनीक को क्रियान्वित करना है। इस प्रणाली में मौजूद सोलर एनर्जी उत्पादन में आने वाले खर्च का केवल 1/6 हिस्सा ही आएगा।

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परियोजना 2. बिजली उत्पादन के लिए पीईएम फ्यूल सेल का व्यापारिक प्रदर्शन - (रद्द)

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क्लोर-अलकली उद्योग भारत में एक सबसे बड़ा रासायनिक उद्योग है और बेहतर होती अर्थव्यवस्था के साथ इस क्षेत्र में और भी विस्तार की संभावनाएं हैं। प्रोटोन-एक्सचेंज मेम्बरेन (पीईएम) ईंधन के कोषाणु क्लोर-अलकली फैक्ट्री से निकलने वाले हाइड्रोजन को कैच करता है और साइट पर ही बिजली का उत्पादन करता है, जिससे बिजली बचत में काफी मदद मिलती है। इस तरह के बिजली उत्पादन के जरिये कोयले से बनने वाली बिजली, जो महंगी भी है और कार्बन-डाइ-ऑक्साइड उत्पादन के जरिये पर्यावरण के लिए हानिकारक भी, का अच्छा विकल्प बन गया है। भारत-अमेरिका साथ मिलकर इस दिशा में कई प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे।

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परियोजना 3. टिकाऊ पर्यावरण, ऊर्जा एवं जल सेवाओं के लिए जैव ईंधन को प्रोत्साहन - (रद्द)

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भारत में पावर सेक्टर में सुधार देश के खेतिहर इलाकों के भूजल स्तर के सुधार पर भी निर्भर करेगा। अनियमित पावर सप्लाई और सब्सिडाइज्ड कीमतों पर मिलने वाली बिजली के चलते किसान जब बिजली मिल रही हो उस समय अपनी जमीनों से ज्यादा से ज्यादा पानी निकालता है। इससे न केवल ज्यादा बिजली खर्च होती है, बल्कि जमीन के नीचे के पानी का स्तर भी गिरता है। इस सब का नुकसान हमें धीमी गति से हो रहे विकास और बढ़ते ग्रीन हाउस इफेक्ट्स के साथ चुकाना पड़ता है। अमेरिका भारत के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश में वाटर अथॉरिटी के साथ मिलकर एक बायोमास आधारित बिजली वितरण नीति एवं अन्य जल प्रबंधन योजनाओं पर काम करेगा। इस कार्य में भारत अमेरिका के प्राइवेट सेक्टर, इंटरेस्ट समूह, निवेशक आदि दावेदार अपनी भागीदारी निभा सकते हैं। किसानों को शिक्षा, आर्थिक मदद एवं अन्य कार्यक्रमों के जरिए ऑन-फॉर्म एनर्जी और पावर बचत के विषय में जानकारी दी जाएगी। सामूहिक तौर पर पानी के बचाव और संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों में आम आदमी को जोडऩे का प्रयास किया जाएगा।

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परियोजना 4. एपीपी मेगा सोलर प्रोजेक्ट

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इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत सभी भागीदार “एशिया-प्रशांत पार्टनरशिप मेगा सोलर प्रोजेक्ट” के नाम से एक लैंडमार्क प्रोजेक्ट को विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में कोरिया के कई इलाकों में फाइनेंस्ड, मैनेज्ड और डिलिवर्ड प्रोजेक्ट्स के जरिये मैगावाट स्केल की सौर फोटोवोल्ट सेल इकाइयां स्थापित की जानी हैं। ऑस्ट्रेलिया की बीपी सोलर कंपनी पांच अन्य साझेदार देशों में साझेदारी के उद्देश्य की पूर्ति के लिए इसी काम को अंजाम देगी। कोरिया की एस-एनर्जी अपनी स्थानीय विशेषज्ञता और कोरिया का ही पीवी मैनुफैक्चरर उद्योग अपनी नवीनतम तकनीक की मदद से इस प्रोजेक्ट को गतिशीलता प्रदान करेगी। यह प्रोजेक्ट 10 मैगावाट से शुरू होकर कुछ वर्षों में 100 मेगावाट के लक्ष्य को भी छुएगा। देश की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में सक्षम यह योजना 120 गीगा हर्ट्ज सोलर (स्वच्छ) बिजली प्रति वर्ष के लक्ष्य के लिए अग्रसर है। इससे 20,000 कोरियाई घरों को बिजली तो मिलेगी ही, साथ में 120,000 टन कार्बन डाई ऑक्साइड प्रति वर्ष के नुकसान से भी बच पाएंगे। इसके अलावा इस योजना से उत्पादन एवं इंस्टालेशन क्षेत्र में रोजगार के असीमित अवसर भी उपलब्ध होंगे।

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परियोजना 5. चीन में फ्यूल फीड स्टॉक के लिए कोक ओवन गैस का इस्तेमाल करने वाला सीएचपी सिस्टम लगाना

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संयुक्त ऊष्मा शक्ति तकनीकी प्रणालियां (सीएचपी) पार्टनर देशों के बीच दक्ष ऊर्जा अवसर मुहैया करती हैं। अमेरिका इस प्रोजेक्ट में अग्रिम भूमिका निभाएगा और चीन की इंडस्ट्री को महत्वपूर्ण टर्बाइन उपकरण के साथ-साथ इनके लिए आवश्यक तकनीक भी उपलब्ध कराएगा। जब यह प्रणाली अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करेगी, तो सालाना 1.2 मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साइड की बचत होगी!

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परियोजना 6. भारत और चीन में नवीकरणीय ऊर्जा का ग्रामीण बिजनेस हब - (रद्द)

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मौजूदा भारत के 700 मिलियन ग्रामीणों में से 56 प्रतिशत जनसंख्या को बिजली न तो नियमित तौर पर मिल रही है और न ही पर्याप्त मात्रा में। अमेरिका इस प्रोजेक्ट के तहत भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ एवं सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करेगा। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 4 पायलट साइट्स के द्वारा एक बिजनेस मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसे प्राइवेट सेक्टर के निवेश से आगे बढ़ाया जा सकेगा। सात अन्य वितरित उत्पादन प्लांट विकसित किए जा रहे हैं, जो 25 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखेंगे। इन कार्यक्रमों से करीब 4,000 लोगों को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। इस प्रयास को भारत के अन्य इलाकों और/अथवा अन्य साझेदार देशों में दोहराया जा सकता है।

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परियोजना 7. साझेदार देशों में जीवाश्म एवं बायोमास फ्यूल्ड इंडस्ट्रियल, इंस्टीट्यूशनल एवं डिस्ट्रिक्ट एनर्जी सीएचपी प्रोजेक्ट्स सहित उच्च कार्यक्षमता वाले सीएचपी

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Download "Facilitating Deployment of Highly Efficient Combined Heat and Power Applications in China" Report

कंबाइंड हीट एंड पावर (सीएचपी) तकनीकी प्रणालियों की उपलब्धता तथा खूबियों और दक्षता और इंवेस्टमेंट सेक्टर के दबाव के बावजूद ये परियोजनाएं लागू नहीं हो पाती हैं। अमेरिका इस ओर पहल करेगा और इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में आ रही सभी रुकावटों को दूर कर साइट पर ही ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास करेगा। शिक्षा, प्रचार-प्रसार के जरिये इस प्रोजेक्ट को ऊर्जा इस्तेमाल कर रहे हर शख्स तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा पार्टनर देशों की डिजाइन एवं कंस्ट्रक्शन कंपनियों को भी इस प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस सीएचपी प्रोजेक्ट के तहत पार्टनर देशों में तीन वर्ष के भीतर 500 मेगावाट स्वज्छ ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कार्यक्रम चलाने की भी योजना है।

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परियोजना 8. चीन में हाई प्रोस्पैक्ट जियोथर्मल एनर्जी परियोजनाओं की पहचान

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Download "Identifying High Value Geothermal Resources in China" Final Report

ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से चीन में यह प्रोजेक्ट भविष्य में उभर कर सामने आने वाले पोटेंशियल जियोथर्मल पावर स्टेशंस की महत्वाकांक्षी खोज के रूप में देखा जा रहा है। चूंकि चीन का ज्यादातर हिस्सा भूकंपीय क्षेत्र में है, इसलिए वहा नॉन-वोल्केनिक क्षेत्र में इन प्रोजेक्ट्स को विकसित करना है। इस को-ऑपरेटिव प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य ऐसे केंद्र स्थापित करना है, जो अपने उद्देश्य में सफल हों और फायदे में भी रहें।

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परियोजना 9. साझेदार विकासशील देशों में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल में नियम सम्बन्धी बाधाओं का विश्लेषण

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नवीकरणीय उर्जा के विकास और उसका उपयोग बढाने के प्रयासों की धीमी गति और सुस्त सफलता के पीछे एमैच्योर मार्केट के अलावा, रेगुलेट्री एवं लीगल फ्रेमवर्क बहुत बड़े कारण हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत चीन, भारत एवं कोरिया में योजना एवं विनियमन परिस्थितियों का पूरा ब्योरा देना और इन प्रोजेक्ट में सफल साझेदार देशों की कार्यप्रणाली के मॉडल को सबके सामने रख इस क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश को बढ़ावा देना है। इस सब का मूल उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ रुझान बढ़ाना और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा विकल्प देना है।

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परियोजना 10. ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच स्वच्छ टेक्नोलॉजी इनवेस्टमेंट विकास एवं डिप्लॉयमेंट की बाधाएं - (पूर्ण)

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Download the Pursuing Clean Energy in India Report

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संस्थानों और समूहों को प्रोत्साहित करना और इसकी राह में मार्केट और नीति सम्बन्धी बाधाओं को पहचानना इस प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य है। इस वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत को क्रियान्वयन करने में आने वाली समस्याओं एवं संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करना और उन पर काम करना भी इसके एजेंडे में है। प्रोजेक्ट के परिणाम स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ दोनों देशों को उसके विस्तार में बेहद कारगर साबित हो सकते हैं।

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परियोजना 11. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा एवं वितरित उत्पादन कार्य हेतु आर्थिक सूचकों का विकास- (रद्द)

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नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत बाजार में पर्याप्त हिस्सा पा रहे हैं। यह उनकी बेहतर आर्थिक संभाव्यता का परिचायक है, लेकिन हवा, हाइड्रो, और बायोमास को छोडक़र अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत, ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों के मुकाबले अभी महंगे हैं। इस गतिविधि में आर्थिक सूचकों के विकास की खोज की जाएगी, जिन्हें नवीकरणीय ऊर्जा के विकास एवं डिप्लॉयमेंट में क्रमिक प्राथमिकता सूची बनाने में इस्तेमाल किया जा सकेगा। आर्थिक सूचकों का इस्तेमाल हरेक साझीदार देश, और समग्रता में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कॉस्ट इफेक्टिव पॉलिसी टूल्स के विकास और कार्यान्वयन में हो सकता है।

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परियोजना 12. पार्टनरशिप में रीडिप्लॉयमेंट हेतु नवीकरणीय ऊर्जा के ढांचे का निर्माण

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यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा विकास के लिए तकनीकी और आर्थिक क्षमता के मूल्यांकन हेतु स्रोत सूचना और टूल्स, दोनों की गुणवत्ता सुधारने में सहायक साबित होगी। इससे भागीदार देशों में नवीकरणीय ऊर्जा एवं वितरित उत्पादन प्रणालियों के व्यापक डिप्लॉयमेंट के अवसरों में इजाफा होगा। इससे स्रोत सूचना को अन्य आंकड़ों तथा टेक्नोलॉजी एवं व्यवस्था की लागत, लोड का स्वरूप, लैंड यूज आदि, के साथ लागू करने के लिए उन्नत टूल विकसित करने में भी मद मिलेगी। इससे अन्य विकल्पों की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा की आर्थिक संभावनाओं पर ठीक-ठीक जानकारी मिल पाएगी। इस गतिविधि में मौजूदा एकीकृत आर्थिक आकलन प्रणाली और टूल्स की समीक्षा की जाएगी। इससे साझीदार देशों में ऊर्जा की हर तरह की क्षमताओं और संभावनाओं का आकलन किया जा सकेगा। इस परियोजना का नेतृत्व अमेरिका करेगा और वह चाहेगा कि वर्ष 2007 के अंत तक सभी साझ्ीदार देशों में बेहतरीन संसाधनों एवं आर्थिक आकलन प्रणालियों का इस्तेमाल शुरू हो। और वर्ष 2010 तक सभी साझीदार देशों के बीच सबसे जरूरतमंद क्षेत्रों के लिए उच्च स्तर की नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन और आर्थिक आकलन का डाटा और टूल्स की उपलब्धता हो जाएगी। समग्रता में, इस परियोजना से सूचना का आधार स्थापित करने में मदद मिलेगी, जिससे कि सक्षम और टिकाऊ नवीकरणीय ऊर्जा का बाजार बन सके।

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परियोजना 13. चीन और भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का स्तरीय प्रशिक्षण

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भारत और चीन की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। नवीकरणीय ऊर्जा को दोनों ही देशों में ऊर्जा की भावी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा जाता है लेकिन अफोर्ड करने लायक लागत और भरोसेमंद नवीकरणीय ऊर्जा सेवाएं कैसे दी जा सकेंगी और कैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा, बिना पर्याप्त ज्ञान और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली और सेवाओं के डिजाइन बनाने, इन्स्टाल करने और रखरखाव करने वाले दक्ष कार्मिकों के अभाव में कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगा। इस परियोजना में ऑस्ट्रेलिया, चीन और भारत के साथ सहयोग करेगा। राष्ट्रीय प्रशिक्षण सक्षमता के व्यवस्थित विकास में समुचित तरक्की हो, इसके लिए भारत और चीन इस तकनीक के प्रोफेशनल विकास के लिए काम करेंगे ताकि देश में अच्छे प्रोफेशनल्स की फौज तैयार हो सके।

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परियोजना 14. यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स में फोटोवोल्टाइक्स ऐंड सोलर एनर्जी इंजीनियरिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति

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इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य अंतराष्ट्रीय शोध को साझीदार देशों के स्नातक स्तरीय छात्रों तक लाना और उन्हें स्कॉलरशिप देकर ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय तक पहुंचाना है, जहां फोटोवोल्टेइक पर बेहतरीन शोध होता है। साथ ही साथ साझीदार देशों में हो रहे शोध के आधार पर फोटोवोल्टेइक पर ठोस पाठ्य सामग्री बनाना ताकि रिसर्च की बेहतर क्वालिटी और मात्रा उभरकर सामने आए।

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परियोजना 15. नवीकरणीय ऊर्जा प्रोत्साहन नीतियों और उपायों के लिए क्षमता निर्माण

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जापान नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत व चीन के साथ मिलकर प्रशिक्षण और सूचनाओं का आदान प्रदान करेगा। इसके द्वारा नई नई नीतियां और बेहतरीन परिणाम सामने आएंगे जो कि राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक होंगे। इसके साथ ही ट्रेनिंग के लिए सेमिनारों का भी आयोजन किया जाएगा, जो साल में एक या दो बार एक से दो सप्ताह के लिए होंगे और साइट विजिट भी इसमें सम्मिलित होगा।

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परियोजना 16. विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जाओं का इस्तेमाल करते हुए स्मार्ट एनर्जी सॉल्यूशन के लिए संभाव्यता अध्ययन एवं विकास*

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इस गतिविधि के तहत स्वतंत्र बिजली आपूर्ति व्यवस्था के विकास पर संभाव्यता अध्ययन किया जाएगा, जिसका नाम होगा- विविध नवीकरणीय ऊर्जाओं का इस्तेमाल करते हुए स्मार्ट ऊर्जा सॉल्यूशन की संभाव्यता का अध्ययन एवं विकास। इसके जरिये विभिन्न साझेदार देशों के चुने हुए इलाकों में स्मार्ट एनर्जी सॉल्यूशनों में डीजी सेटों का एकीकरण किया जाएगा। इनके द्वारा छोटे छोटे माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे जिनसे सहयोगी देशों की ऊर्जा की मांग और खपत को संतुलित रखा जा सके। जापान, चीन और भारत इस अध्ययन में भाग लेंगे

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परियोजना 17. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में परिवहन हेतु जैव ईंधन की विस्तार योजना पर अध्ययन - (रद्द)

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इस गतिविधि के तहत जैट्रोफा जैसे पारंपरिक कच्चे माल का इस्तेमाल करते हुए बायो डीजल के उत्पादन की संभावनाओं पर अध्ययन किया जायेगा। लेकिन इसमें क्षेत्र के भागीदार देशों में रेपसीड तथा सोयाबीन तेल की सहज आपूर्ति का भी ध्यान रखा जाएगा। इस प्रोजेक्ट के द्वारा क्षेत्र के भागीदार देशों में बायो डीजल के इस्तेमाल एवं वितरण हेतु बुनियादी ढांचे की कमियों का भी ध्यान रखा जाएगा। कोरिया इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेगा। वह पारंपरिक एवं उन्नत बायो डीजल के विश्लेषण, मापन के तरीकों का मानकीकरण और मानकों के निर्माण के जरिये बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा।

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परियोजना 18. नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बाजार का विकास

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भारत में बिजली के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन यानी प्रेषण और वितरण में लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक ऊर्जा की हानि होती है जबकि समाज के बहुत बड़े हिस्से को और ज्यादा भरोसेमंद ऊर्जा की जरूरत है। कुल बिजली में वितरित उत्पादन के हिस्से को बढ़ाने से स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति और उत्सर्जन-कटौतियों में सुधार होगा। अगर ऊर्जा के स्रोत उपभोक्ता के पास ही मौजूद होंगे तो इसमें तकनीकी नुकसान तो बचेगा ही, इसके अलावा कॉमर्शियल (व्यावसायिक) नुकसान भी कम होगा। ये पावर सिस्टम टी एंड डी की हानि और जी एच जी का उत्सर्जन कम करने की उल्लेखनीय क्षमता रखते हैं, विशेष कर तब, जब ज्यादा से ज्यादा साफ ईंधन और तकनीक का प्रयोग हो। अमेरिका इस परियोजना का नेतृत्व करेगा और वितरण प्रक्रिया में सुधार लाने वाले नए विचारों और तकनीकियों के कार्यान्वयन में भारत की मदद करेगा। ये नए विचार और तकनीकें लघु तथा अधिक कुशल वितरित ऊर्जा उत्पादन प्रणालियों की स्थापना और उपयोग के प्रसार पर ध्यान केन्द्रित करेंगे और ये प्रणालियां उपभोक्ताओं के और करीब होंगी।

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परियोजना 19. साझेदार देशों में हाइड्रो पावर पर पब्लिक-प्राइवेट सेक्टर पार्टनरशिप

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यह परियोजना साझेदार देशों में नवीकरणीय एवं वितरित उत्पादन प्रौद्योगिकियों के लिए माहौल बनाने के प्रयासों में कार्य बल को मदद करेगी। परियोजना साझेदार देशों में हाइड्रोपावर प्लांट लगाने में आने वाली बाधाओं की पहचान करेगी। सहयोगी दशों में हाइड्रो पावर पर 200 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश होगा जो उनकी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के मुताबिक होगा। इस परियोजना का नेतृत्व अमेरिका और भारत करेंगे।

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परियोजना 20. भारत में साफ हवा, ऊर्जा सुरक्षा एवं टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु हाइड्रोजन ईंधन का इस्तेमाल करते हुए वितरित बिजली उत्पादन का व्यवसायीकरण - (रद्द)

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यह परियोजना भारत में हाइड्रोजन ईंधन वाले जेनरेटरों के जरिये विद्युत उत्पादन के व्यवसायीकरण पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसके अतिरिक्त यह परियोजना उन घरों और व्यावसायिक घरानों की संख्या में 1000 से 2000 तक का इजाफा करना चाहती है, जो स्वच्छ हवा और भरोसे की बिजली इस्तेमाल करें और जिससे वायु प्रदूषण कम हो और टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले। यह परियोजना भारत के ग्रामीण इलाके में स्थित होगी, जहां पास ही में हाइड्रोजन ईंधन वाले सहयोगी भी हों। इस परियोजना से भारत को नवीकरणीय ऊर्जा का बुनियादी ढांचा खड़ा करने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ एवं कारगर बिजली उत्पादन का ढांचा तैयार होगा।

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परियोजना 21. बिजली एवं परिवहन एप्लिकेशंस के लिए सोलर इनहैन्स्ड फ्यूल का प्रदर्शन

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इस परियोजना का उद्देश्य भाप और कार्बन डाई ऑक्साइड से प्राकृतिक गैस में सुधार के लिए सौर ऊर्जा की नई सोलराइजेशन प्रक्रिया के इस्तेमाल से सिनगैस के उत्पादन में लागत कम करना है, जिसे गैस टर्बाइन में इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट पहले से ही चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया में चल रहा है। कुल मिलाकर इसका उद्देश्य बिजली पैदा करने के लिए नए रिएक्टर्स से विकास और कार्बन डाई ऑक्साइड का इस्तेमाल कर और ज्यादा से ज्यादा गंदे नालों का इस्तेमाल और कम से कम साफ पानी का इस्तेमाल करना है। सौर ऊर्जा की पूरी प्रक्रिया के इस्तेमाल से काम का माहौल सुधरेगा जिससे भविष्य में ऐसे अनेक प्रोजेक्ट लगेंगे। यह नमूना प्रोजेक्ट भागीदार देशों को कारगर एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने वाली नई टेक्नोलॉजी देने में सक्षम है।

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परियोजना 22. वितरित बिजली उत्पादन के लिए फ्लेक्सीबल बायोमास गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी

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कुल मिलाकर इस अनुसंधान एवं विकास परियोजना का उद्देश्य वितरित बिजलही उत्पादन के लिए प्रस्तावित बायोमास गैसीफिकेशन तकनीक के विभिन्न तकनीकी पहलुओं का प्रदर्शन है ताकि साझीदार देशों में नवीकरणीय एवं भरोसेमंद ऊर्जा के सस्ते और भरोसेमंद संसाधन के रूप में बायोमास के व्यावसायिक प्रयोग को तेज किया जा सके। आस्ट्रेलिया इस कार्यक्रम को जापान, चीन, भारत एवं कोरिया के साथ मिल कर आगे बढ़ाएगा। आशा है कि इस तकनीक से बायोमास गैसीफिकेशन के यातायात में आसानी होगी। और विषेश कर गांवों में ऊर्जा के नए स्रोत पैदा होंगे, विशेषा कर ऐसे गांवों में जहां बायोमास ईंधन पैदा होता है ।

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परियोजना 23. सोलर फोटोवोल्टेइक लीनियर कन्संट्रेटर सिस्टम्स

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इस अनुसंधान एवं विकास परियोजना का उद्देश्य उन्नत फोटोवोल्टेइक लीनियर कन्संट्रेटर विकसित करना है। इस तकनीक द्वारा तैयार कन्संट्रेटर विभिन्न बाजारों के व्यावसायिक मुकाबले में खड़े हो सकते हैं। इस टेक्नोलॉजी से लागत कम आती है और कार्य क्षमता बढ़ती है। यह परियोजना भारत के सहयोग से आस्ट्रेलिया चलाएगा। इस प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य सभी भागीदार देशों में बड़े पैमाने पर कन्संट्रेटर के जरिये फोटोवोल्टेइक तैनात करने के रास्ते में आ रही अड़चनों को दूर करना है।

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परियोजना 24. डाय-सेंसिटाइज्ड सोलर सेल्स के लिए मटीरियल्स और इंटरफेस इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी का विकास - (रद्द)

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During the past decade, refinements in the chemical components of solar cells, improvements in cell physics, and device engineering have led to remarkable enhancement of dye-sensitized solar cell performance. These enhancements can potentially provide low-cost, large-area, flexible, and high efficiency solar cells for all Partner countries. The goal of this project is to develop materials and interface engineering technologies for dye-sensitized solar cells through collaborations between Partner countries.

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परियोजना 25. नवीकरणीय कूलिंग एवं पावर जनरेशन प्रणाली का डिजाइन एवं विकास

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नए कूलिंग सिस्टम एवं ऊर्जा के विकास के लिए डिजाइन तैयार करना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। साथ ही दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में, जहां विद्युतीकरण नहीं हुआ है और जिन इलाकों का सामाजिक-आर्थिक विकास किया जाना है, बिजली की मांग के अनुसार आपूर्ति करना है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के जरिये इन इलाकों में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा बढ़ाना भी इसका उद्देश्य है। यह परियोजना एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के जरिये हीटिंग और कूलिंग तथा बिजली उत्पादन के प्ररूप डिजाइन करना चाहती है। इससे आवासीय इलाकों में वातानुकूलन तो बढ़ेगा ही साथ ही दूरस्थ इलाकों में रेफ्रिजिरेशन की सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी। इस परियोजना में भारत और ऑस्ट्रेलिया साझीदार की भूमिका में होंगे।

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परियोजना 26. खारे पानी में सूक्ष्म शैवाल से बायो डीजल के उत्पादन हेतु पूर्ण एकीकृत प्रक्रिया

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इस परियोजना का उद्देश्य बायो डीजल के उत्पादन हेतु टिकाऊ फीडस्टॉक सूक्ष्म शैवाल तेल यानी माइक्रो एल्गी ऑयल के उत्पादन के लिए एकीकृत प्रक्रिया की तकनीकी और आर्थिक संभावनाओं को प्रदर्शित करना है। छोटे स्तर पर किए जाने वाले अध्ययनों के आधार पर कुल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का आकलन एवं आर्थिक संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। यदि ये अध्ययन कामयाब हो जाते हैं तो दूसरे चरण में आर्थिक एवं ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का व्यापक स्तर पर आकलन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया, चीन और भारत साझीदार देश होंगे।

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परियोजना 27. दूरस्थ पावर सिस्टम एवं ग्रिड कनेक्शन हेतु न्यू जनरेशन स्मॉल विंड टरबाइंस

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आर्थिक रूप से व्यवहार्य एवं भरोसेमंद छोटी पवन चक्कियों पर अनुसंधान और विकास करना है। इन इलाकों में कोई ग्रिड न हो लेकिन ग्रिड से जोडऩे की संभावना हो। यह प्रोजेक्ट छोटी पवन चक्कियों के विभिन्न परिस्थितियों में इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन करेगी, ताकि इनके डिजाइन सुधारे जा सकें, सुरक्षा प्रविधियों को विकसित किया जा सके और लागत कम की जा सके। इस परियोजना के साझीदार देश हैं ऑस्टे्रलिया और चीन।

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परियोजना 28. नवीकरणीय ऊर्जा आधारित सशक्तीकरण के जरिये आर्थिक असमानता को भरना

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इस परियोजना का लक्ष्य, रूरल इंटरप्रिन्योरशिप जोन यानी आरईजेड की स्थापना के जरिये ग्रीन पावर और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना और टिकाऊ आर्थिक विकास का प्रदर्शन करना है। ये आरईजेड भारत के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय लघु उद्यमों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की सांस्थानिक एवं वित्तीय व्यवहार्यता का प्रदर्शन करेंगे। इन नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षेत्रों के आसपास आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका प्रमुख उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना होगा। साझीदार देश यहां आरईजेउ को विकसित करने और संचालित करने के लिए बेहतर मॉडल की तलाश करेंगे। वे नीतिगत समर्थन और वित्तीय निवेश के लिए पार्टनरशिप तलाशेंगे और चारों तरफ इसको लागू करने की कोशिश करेंगे। इसके रणनीतिक पहलुओं का प्रचार करेंगे ताकि आरईजेड के बिजनेस मॉडल को स्थापित किया जा सके। भारत और अमेरिका इस परियोजना के भागीदार होंगे।

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परियोजना 29. एपीपी देशों में “स्मार्ट मिनी ग्रिड्स” के डिप्लॉयमेंट में तेजी लाना

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This project will help to develop technologies for the reliable and efficient operation of minigrids, and seek to prove the technical feasibility, commercial viability and ability to efficiently integrate renewable energy. Participating Partners will design and develop a pilot smart minigrid in Australia and use this pilot as a model for deployment in India. As part of the design process for the initial Australian deployment, Australia's Commonwealth Scientific and Industrial Research Organisation (CSIRO) will cooperate with Korea, which have active research programs in this field (RDG-06-16 “Feasibility study and development of microgrid smart energy solutions.”) Once the Australian pilot grid is commissioned and fully operational, the design will be used as the basis for a deployment in India through close cooperation with the Energy and Resources Institute (TERI) and the Indian government. Australia, India, and Korea are participating Partners in this project.

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परियोजना 30. भारत में वितरित उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के व्यापारीकरण में तेजी लाना

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इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत में वितरित उत्पादन के लिए बड़े सौर ऊर्जा फोटो वोल्टेइक सिस्टम्स के व्यवसायीकरण को गति देना है। साझीदार देश इसके लिये भारत के ग्रामीण एवं अन्य ग्राहकों तक पहुंचने के लिए नए निवेश अवसर पैदा करेंगे। दरअसल इन्हीं लोगों को भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति की जरूरत है। साथ ही बैंक गारंटी का इस्तेमाल करते हुए वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने की कोशिश करेंगे ताकि देश में ही सौर ऊर्जा का सिस्टम विकसित हो और इसे किफायती बनाया जा सके। ऊंची कार्यक्षमता वाले उपकरणों को देश में ही असेंबल करके इसके उत्पादन की लागत कम की जा सके तथा ग्रामीण और बाकी उपभोक्ताओं तक पहुँच बढ़े। इसका उद्देश्य सोलर सिस्टम को और सस्ता करना है। इस परियोजना में अमेरिका और भारत साझीदार की भूमिका निभाएंगे।

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परियोजना 31. नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल से दूरस्थ ग्रामीण विद्युतीकरण के सहयोगपूर्ण विकास एवं ओप्टिमाइज्ड मॉडल का प्रदर्शन

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इस परियोजना का ध्येय भारत के दूरस्थ गांवों में सौर पीवी और अन्य प्रौद्योगिकियों की मदद से विद्युतीकरण के लिए एक ऐसा मॉडल बनाना है, जिसे अन्य जगहों पर भी लागू किया जा सके। ऐसा करते हुए भागीदार देश भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के तकनीकी सेवा प्रदाताओं का एक नेटवर्क बनाना चाहते हैं, जिससे यहीं पर क्षमता निर्माण संभव हो सके। साथ ही भारत में ही विकेंद्रित उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा सिस्टम विकसित किया जा सके। सामुदायिक नवीकरणीय ऊर्जा सिस्टम के मॉडल से ऑफसेटिंग के जरिये ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती हो सके और दूरस्थ इलाकों के बाशिंदों की पारंपरिक तरल पेट्रोलियम ईंधन की जरूरत भी कम हो सके। यह मॉडल भारत के ग्रामीण इलाकों में एक से तीन गांवों तक की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकेगा। अर्थात् लगभग 1200 लोगों के लिए बिजली की व्यवस्था हो सकेगी। आस्ट्रेलिया और भारत इसमें सहयोगी की भूमिका में हैं ।

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परियोजना 32. ग्रिड से जुड़ी नवीकरणीय ऊर्जा एवं वितरित उत्पादन में भागीदारी

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Download Handbook on Best Practices for the Successful Deployment of Grid-Connected Renewable Energy, Distributed Generation, Cogeneration and Combined Heat and Power in India

ही इन अड़चनों से निबटने के लिए रणनीतियां बनाना भी इसका काम है। इस परियोजना में काम का गंभीर आकलन, विभिन्न एपीपी भागीदार देशों और वर्कशॉप्स में साइट विजिट शामिल है। इसके आधार पर नवीकरणीय ऊर्जा एवं वितरित उत्पादन के डिप्लॉयमेंट में अपनाई जा रही बेहतरीन कार्य पद्धतियों और नीतियों को रेखांकित करने वाली एक हैंडबुक तैयार की जाएगी। अमेरिका और भारत इसमें साझीदार की भूमिका निभाएंगे ।

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परियोजना 33. 10 किलोवाट के प्रोटोन एक्सचेंज मेंबरेन फ्यूल सेल्स (पीईएमएफसी) पावर सिस्टम का विकास एवं अनुप्रयोग

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पी.ई.एम. फ्यूल सेल्स के व्यापारिक स्तर पर विकास से ऊर्जा के उत्पादन और उपभोग में जबर्दस्त संभावनाएं हैं। बिजली उत्पादन के मौजूदा तरीकों से पैदा होने वाले ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में इससे व्यापक कटौती होती है। इस परियोजना का उद्देश्य तीसरी पीढ़ी की फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी के जरिये फ्यूल सेल तकनीक का व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ाना है, जिसका परीक्षण व विकास अभी शंघाई शेनली एंड इनफिनिशियम एनर्जी नामक कंपनी में चल रहा है। आशा है कि जल्द ही 10 किलोवाट का फ्यूल सेल मॉड्यूल काम करने लगेगा, जो व्यावसायिक वाहनों में इस्तेमाल हो सकेगा या एक जगह पर स्थित पावर जेनरेटिंग सिस्टम के रूप में काम करेगा। इस तरह विकसित किए गए फ्यूल सेल सस्ते दामों में वर्ष 2021 तक व्यावसायिक इस्तेमाल में आ सकेंगे। इसमें साझीदार की भूमिका में चीन और अमेरिका होंगे।

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परियोजना 34. लघु गैस टर्बाइन पैकेजिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग में चीन जैसी स्थानीयता तक पहुंचने के लिए जी ई 10 टेक्नोलॉजी को अपनाना

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प्राकृतिक गैस की बढ़ती आपूर्ति, प्राकृतिक गैस पाइप लाइनों की उपलब्धता और गैस टर्बाइन तकनीकों के निरंतर विकास की वजह से लघु गैस टर्बाइन तकनीक आधारित विकेंद्रीकृत बिजली उत्पादन का महत्व चीन और विश्व भर में बढ़ गया है हालांकि पैकेजिंग की लागत, निर्माण और लघु गैस टर्बाइन की सर्विसिंग कुछ ऐसी बाधाएं हैं, जो इस टेक्नोलॉजी को व्यापक इस्तेमाल में नहीं आने दे रहीं। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य चीनी बाजार में जी.ई. 10 छोटे गैस टर्बाइन को उतारना है। इससे नए नए स्थानीय उत्पादन स्तर, बाजार का आकलन और नीति की सिफारिशों के लिए अवसरों का पता चल सकेगा। इससे लघु गैस टर्बाइन प्रदर्शन परियोजना और समूचे विकेंद्रीकृत बिजली उत्पादन बाजार में इस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया जा सकेगा। परियोजना की योजना इस्पात एवं कोयला उद्योग सहित सभी ऊर्जा सघन क्षेत्रों में लघु गैस टर्बाइन टेक्नोलॉजी प्लान्टों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है। चीन और अमेरिका इस परियोजना के साझेदार होंगे।

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परियोजना 35. 2010 के एक्सपो के लिए रोएवे फ्यूल सेल कार के डिजाइन, निर्माण एवं प्रदर्शन हेतु एसएआईसी एवं जीएम में सहयोग

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गैसों के उत्सर्जन में कटौती का उल्लेखनीय अवसर प्रदान करती है। आशा है कि 10 फ्यूल सेल से चलने वाली कार व बस वर्ष 210 की मई से अक्टूबर के बीच होने वाले बहुचर्चित शंघाई विश्व एक्सपो में देखने को मिलेगी। 184 दिन तक चलने वाले इस एक्सपो में 7 करोड़ लोग जीरो उत्सर्जन वाली फ्यूल सेल से चलने वाली कार देखेंगे। योजना यह है कि खास लोगों को मेले में इसी कार में घुमाया जाए। अनुमान है कि इसकी ओर लोगों का आकर्षण रहेगा। इस परियोजना में सहभागी देशों की भूमिका में चीन और अमेरिका होंगे।

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परियोजना 36. कोकिंग ओवन गैस (सीओजी) कंबाइंड हीट एवं पावर प्लांट

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इस परियोजना का उद्देश्य कोक ओवन गैस को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करके बिजली और ऊष्मा के डिस्ट्रिब्यूटेड कोजेनरेशन सिस्टम का प्रदर्शन है। कोक ओवन गैस कोकिंग प्रक्रिया का बायप्रोडक्ट है। इस प्रक्रिया से आप 20 प्रतिशत तक ऊर्जा बचा सकते हैं। आज यह प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण चीन में अपनी मान्यता चाहता है क्योंकि अभी तक वहां इसे कचरा माल और प्रदूषक समझ् कर अनदेखी की जाती रही है जबकि वहां सालाना 2 करोड़ घन मीटर गैस तैयार होती है। इस गतिविधि के जरिये ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को तो कम किया ही जा सकता है, साथ ही कोक ओवन गैस बाय प्रोडक्ट को ईंधन के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करके आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकेगा। चीन के सांक्सी प्रांत में कोक का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। इसे फैसिलिटी साइट के तौर पर चुन लिया गया है। चीन और अमेरिका इस कार्यक्रम में सहभागी की भूमिका में होंगे।

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परियोजना 37. पीवी मॉड्यूल विश्ववसनीयता के बारे में चीन के साथ तकनीकी आदान प्रदान

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इस परियोजना का लक्ष्य है पीवी मॉड्यूल के लिए विश्वसनीयता विधियों का विश्वव्यापी प्रसार और सम्पूर्ण उत्पादन प्रक्रिया के दौरान शोध एवं विकास तथा गुणवत्ता नियंत्रण पर बल देना। टेक्नोलोजी के इस हस्तांतरण के औजार होंगे कार्यशालाएं, तकनीकी प्रशिक्षण और सम्मलेन। अमेरिका चीन के उत्पादकों और प्रमाणिकता विशषज्ञों के लिए राष्ट्रिय प्रोयोगशालाओं तथा विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग करके वर्तमान विधियों और मानकों के बारे में तकनीकी संसाधन उपलब्ध कारयेगा। इस परियोजना में अमेरिका और चीन प्रमुख भागीदार हैं।

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परियोजना 38. वितरित उत्पादन गतिमयता- चीन में संयुक्त ताप और विद्युत उपयोग

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इस परियोजना का लक्ष्य है पणधारी वचनबद्धता, कार्ययोजनाओं, और नीति विकल्पों का विकास करके चीन में प्रान्तीय स्तर पर संयुक्त ताप और विद्युत (सीएचपी) तथा स्वच्छ वितरित उत्पादन के उपयोग को बढ़ाना । सही नीतियों और प्रोत्साहनों के ज़रिए चीन में वितरित सीएचपी पद्धतियों के विस्तार की बड़ी सम्भावनाएं हैं । इस ग्रिड आधारित सीएचपी से अधिक कुशल ग्रिड -आधारित प्रणाली में लचीलापन, विश्वसनीयता और सुरक्षा बढ़ेगी । नीति परिवर्तन के लिए आधार तैयार करने के मुख्य उपकरणों के रूप में हर चीनी प्रान्त में कार्यशालाओं, स्थल दौरों और पुस्तिकाओं का इस्तेमाल किया जाएगा । इस परियोजना में अमेरिका और चीन साझेदार देश हैं ।

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परियोजना 39. भारत और जपान में पीवी मौड्यूल की दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए सहकारी अनुसंधान

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इस परियोजना का लक्ष्य है ऐसे अक्षय पीवी मौड्यूल का विकास जो भारत और जापान की कठिन वातावरणीय परिस्थितयों में काम कर सकें । भारत की जलवायु के अधिक अनुकूल पीवी मौड्यूल कैसे तैयार किर जाएं इस बारे में अनुसंधान करके यह परियोजना भारत में नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग में सहायता देगी । इस परियोजना के तहत मैदान में पीवी मौड्यूल के अपकर्ष के बारे में ब्यौरेवार रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिनका क्षय न होता हो ऐसे पीवी मौड्यूल निर्मित करने के तरीके और क्रियाविधियां तय की जाएंगी, और ऐसी रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिसमें भारत और जापान के वातावरणीय प्राचल आंकड़े होंगे । इस परियोजना में भाग लेने वाले देश हैं भारत और जापान ।

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* अग्रणी योजनाएं