स्वच्छ विकास एवं पर्यावरण पर एशिया-प्रशांत साझेदारी सात देशों -ऑस्ट्रेलिया, कैनाडा, चीन, जापान, भारत, कोरिया, और अमेरिका के बीच एक स्वैच्छिक साझेदारी है, जो बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और उससे जुड़े मुद्दों, मसलन, वायु प्रदूषण, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर काम कर रही है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अभिनव प्रयास के रूप में गठित एशिया-प्रशांत साझेदारी का उद्देश्य उन लक्ष्यों को इस तरह हासिल करना है कि आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन, और अतिप्रभावी स्वच्छ प्रौद्योगिकी के विकास और विस्तार को गति मिले।
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साझेदारी के चार्टर के तहत गठित नीति एवं कार्यान्वयन समिति (पीआईसी) पूरी साझेदारी की निगरानी करती है। यह आठ कार्य बलों का मार्गदर्शन करती है, समय-समय पर उनके कार्यों की समीक्षा करती है, और प्रशासनिक समूह को दिशा-निर्देश देती है। पीआईसी सभी साझेदार देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को मिलाकर गठित हुई है।
कार्य बलों का नेतृत्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष करते हैं, जो अपने-अपने कार्य बलों के विशिष्ट उद्देश्यों को हासिल करने के लिए निजी और सरकारी सहयोग से हो रहे कामकाज की देखरेख करते हैं।
साझेदारी-चार्टर द्वारा अधिकृत और फिलहाल अमेरिका की मेजबानी में काम कर रहा प्रशासनिक सहायता समूह पीआईसी और साझेदार देशों को व्यापक मदद उपलब्ध कराता है। साथ ही उनकी विभिन्न सूचनाओं एवं गतिविधियों के बीच समन्वय बिठाने का काम करता है।
सात साझेदार देशों में से हर देश की विभिन्न सरकारी एजेंसियां और निजी कंपनियां इस साझेदारी में सक्रिय रूप से शामिल हैं। यदि आप किसी विशेष कार्यबल के प्रतिनिधियों के बारे में जानना चाहते हैं, तो कृपया t APP_ASG@state.gov, पर प्रशासनिक सहायता समूह से संपर्क करें।
इन सातों देशों -ऑस्टे्रलिया, कैनाडा, चीन, भारत, जापान, कोरिया और अमेरिका - में स्वच्छ विकास, उर्जा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर द्विपक्षीय व बहुपक्षीय करीबी सहयोग का एक इतिहास रहा है। ये सातों देश अपने-अपने देश में प्रदूषण के स्तर में गिरावट लाने, उर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वच्छतम व सक्षम प्रौद्योगिकी के विकास एवं प्रसार के समान हित से जुड़े हैं, ताकि वे अपने-अपने आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकें और गरीबी का उन्मूलन कर सकें। साथ ही, ये सात देश पूरी दुनिया की आधी से अधिक उर्जा खपत, जनसंख्या और अर्थव्यवस्था के मालिक हैं।
स्वच्छ विकास और पर्यावरण पर एशिया-प्रशांत साझेदारी का जन्म 28 जुलाई, 2005 को विएन्तिएन, लाओस में एशियन रीजनल फोरम (एआरएफ) की बारहवीं बैठक में साझेदारी के दृष्टि घोषणापत्र जारी किए जाने के साथ हुआ। 12 जुलाई, 2006 को सिडनी,ऑस्ट्रेलिया में मंत्रीस्तरीय बैठक में एशिया-प्रशांत साझेदारी औपचारिक रूप से शुरू हुई। सिडनी में साझेदार देश एक चार्टर पर सहमत हुए। वहीं विज्ञप्ति तैयार हुई, सरकारी और निजी उद्योगों के प्रतिनिधियों वाले कार्य बलों की कार्य-योजना की रूप रेखा तैयार हुई, जो आठ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इन कार्यबलों द्वारा की जाने वाली थी।
अप्रैल 2006 में बर्कले, अमेरिका में कार्यबलों और नीति एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक हुई। कार्यबलों ने अपनी प्राथमिकताओं को पहचानना शुरू किया और वे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य-योजना तैयार करने में जुट गए।
अक्टूबर 2006 को जेजु, कोरिया की दूसरी पीआईसी बैठक में साझेदार देशों ने करीब 100 स्वायत्त योजनाओं एवं गतिविधियों समेत आठ कार्यबलों को मंजूर किया। पीआईसी ने कार्यबलों को इस साझेदारी के उद्देश्यों एवं विजन को चित्रित व प्रदर्शित करने वाली अतिरिक्त योजना और कार्यक्रमों के अनुमोदन के लिए दिशानिर्देश भी दिए।
तभी से कार्यबलों ने अपने कार्यों को अंजाम देना शुरू कर दिया और वे नियमित रूप से बैठक करने लगे। जुलाई 2007 में टोक्यो, जापान में पीआईसी की तीसरी बैठक में कार्य बलों ने अपनी-अपनी रिपोर्टें पेश कीं और पीआईसी ने अनेक अतिरिक्त योजनाओं और दूसरी मंत्रीस्तरीय बैठक को अपनी मंजूरी दी।
अक्तूबर 2007 में नई दिल्ली में मंत्रीस्तरीय बैठक में मंत्रियों ने सातवें साझेदार के रूप में कैनाडा का जोरदार स्वागत किया, आठ कार्य योजनाओं और 100 से अधिक संबंधित योजनाओं, साथ ही आठ प्रतिनिधि परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई तथा एशिया-प्रशांत उर्जा प्रौद्योगिकी सहयोग केंद्र की शुरुआत की घोषणा की गई।
जनवरी की मंत्रीस्तरीय बैठक के बाद हम तेज गति से आगे बढ़ते रहे हैं। अप्रैल 2006 में पीआईसी ने आठ कार्य बलों के लिए निर्देश दिए। कार्य बलों का गठन हुआ और तब उन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अपने-अपने स्तर पर कार्य योजना बनाने, संबंधित कार्यक्रमों और गतिविधियों को रेखांकित करने के लिए बैठकें कीं। इसके बाद अक्टूबर 2006 में पीआईसी की बैठक हुई और उसने इन कार्य योजनाएं से संबंधित करीब 100 योजनाओं को मंजूरी दी। तभी से कार्य बल क्रियान्वयन के चक्र में सक्रिय है और इन गतिविधियों का उत्तरदायित्व उठा रही हैं। अक्टूबर 2007 की नई दिल्ली मंत्रीस्तरीय बैठक में साझेदार देशों के मंत्रियों ने कार्यबल कार्य-योजना और संबंधित योजनाओं के साथ-साथ तमाम अतिरिक्त प्रतिनिधि परियोजनाओं को अपनी स्वीकृति दी। जुलाई 2008 में पीआईसी द्वारा 123 योजनाएं अनुमोदित की गई हैं। इन योजनाओं और गतिविधियों का सार-संक्षेप पढऩे के लिए हमारी परियोजना सूची को देखें।
जो लोग कार्य बल के काम में भागीदारी करना चाहते हैं, वे प्रशासनिक सहायता समूह को (APP_ASG@state.gov), पर ई-मेल कर सकते हैं और अपना नाम, संपर्क पता, सूचना और अभिरुचि का क्षेत्र मुहैया कराएं।
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आने वाले कार्यक्रमों के बारे में अधिक जानकारी के लिए www.asiapacificpartnership.org पर जाएँ।
अधिक जानकारी के लिए www.asiapacificpartnership.org पर जाएं। यदि आपका कोई विशेष प्रश्न है, तो कृपया प्रशासनिक सहायता समूह को APP_ASG@state.gov पर ई-मेल करें।